ट्रू मीडिया पत्रिका विशेषांक के बहाने श्री विनोद पाराशर व्यक्तित्व -कृतित्व पर परिचर्चा !

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दिल्ली। आज भी साहित्य की दो धारायें बह रही है। एक धारा वह है जिसमें इलीट वर्ग का साहित्य है। यह साहित्य जनसमान्य से सीधा नहीं जुड़ा है। उस तक पहुँच भी नहीं पा रहा है, लेकिन यह नहीं कहा जा सकता कि यह अच्छा साहित्य नहीं है।साहित्य की दूसरी धारा में वह साहित्य है- जो मंचो पर हो रहे कवि सम्मेलनों के माध्य्म से जनता से सीधा संवाद करता है। आजकल अधिकतर कवि-सम्मेलनों में कविता के नाम पर जो कुछ परोसा जा रहा है, उसमें साहित्य कम, चुटकुलेबाजी ज्यादा नज़र आ रही है। कविता वह नहीं है, जो सतही तौर पर आपको छुए, कुछ मनोरंजन करे और निकल जाये। कविता वह है जो आपको नींद से जगाये और धीरे धीरे आपके अंदर तक अपनी पैठ बनाये। कुछ कवि हैं जो साहित्य की इन दोनों धाराओं में शामिल हैं और अच्छी कवितायें लिख रहे हैं। विनोद पाराशर भी ऐसे ही कवियों में शामिल हैं’ उक्त विचार 17 जुलाई को हिंदी भवन में आयोजित एक साहित्यिक समारोह में वरिष्ठ कवि, नाटककार, बाल साहित्यकार डॉ प्रताप सहगल ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में व्यक्त किये। कार्यक्रम का आयोजन-वरिष्ठ साहित्यकार श्री विनोद पाराशर के व्यक्तित्व- कृतित्व पर केंद्रित, राष्ट्रीय पत्रिका ‘ट्रू मीडिया’ विशेषांक व ‘इंडिया नेट बुक्स’ द्वारा प्रकाशित उनके कविता-संग्रह ‘नया-घर’ के विमोचन के अवसर पर किया गया था। कार्यक्रम में मंच पर विराजमान उनके कई साहित्यिक मित्रों ने उनके कविता-संग्रह’नया घर’ की कविताओं व उनके व्यक्तित्व पर भी चर्चा की। मुख्य वक्ता के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ शशि सहगल ने कहा कि वे विनोद को पिछले लगभग 40 वर्षों से जानती हैं और उन्होंने नया घर की सभी कवितायें को पढा है। वे बहुत ही परिश्रमी व सीधे व्यक्ति हैं। बड़े संघर्ष के बाद, आज उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है। उनका यह संघर्ष, उनकी कविताओं में भी नज़र आता है। बड़ी खुशी की बात है कि ‘ट्रू मीडिया’ जैसी प्रतिष्ठित पत्रिका ने उन पर अपना विशेषांक निकाला है। दूसरी मुख्य वक्ता-वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सविता चड्ढा ने भी विनोद से हुए परिचय से जुड़े अपने कई पुराने संस्मरण साझा किये। उन्होंने नया घर से चुनी कुछ खास कविताओं पर भी चर्चा की। राष्ट्रीय गीतकार डॉ. जयसिंह आर्य का सानिध्य भी इस कार्यक्रम में मिला।उन्होंने कहा कि विनोद से उनका 42 साल पुराना नाता है। वे बहुत ही ईमानदार, दोस्ती निभाने वाले व बड़े ही स्वाभिमानी व्यक्ति हैं। उन्होंने विनोद के लिए लिखी गई कुछ पक्तियाँ भी सस्वर पढ़ी। इंडिया नेट बुक के निदेशक डॉ संजीव कुमार ने कहा कि वे प्रकाशक से पहले एक कवि व साहित्यकार भी हैं, इसलिए एक लेखक की पीड़ा को वे भली भांति समझते हैं। उनके प्रकाशन का उद्देश्य अच्छे साहित्य को जनता तक पहचाना है। विनोद पाराशर के ‘नया घर’ की कवितायें अच्छी लगीं, इसलिए उन्होंने इसे प्रकाशित करने का निर्णय लिया। ट्रू मीडिया के सम्पादक व प्रकाशक डॉ. ओमप्रकाश प्रजापति ने भी इस संबंध में अपने विचार रखे। उन्होंने इस अवसर पर अपनी पूरी टीम के साथ, विनोद पाराशर को ‘ट्रू मीडिया गौरव सम्मान-2022’ से नवाजा और पगड़ी व शाल ओढाकर भरपूर सम्मान किया।
अन्य वक्ताओं में शामिल थे- वरिष्ठ साहित्यकार, रंगकर्मी, इवेंट मैनेजर व पत्रकारिता से जुड़े श्री किशोर श्रीवास्तव, वरिष्ठ कलमकार राजव्रत आर्य और वरिष्ठ पत्रकार डॉ सूरज दत्त सेठी। श्री किशोर श्रीवास्तव जी ने बड़े ही रोचक अंदाज में विनोद से जुड़े संस्मरणों को सुनाया। विनोद के कालेज के साथी रहे श्री राजव्रत व उनके घनिष्ठ मित्र डॉ सूरज दत्त सेठी ने भी अपने मन के उदगार व्यक्त किये। इस अवसर पर सेठी जी थोड़े भावुक भी हो गये और अपनी पूरी बात नहीं रख पाये।
इस कार्यक्रम को पूरी तन्मयता से सजोया व रोचकता से प्रस्तुत किया प्रसिद्ध ग़ज़लकार व साहित्यकार श्री संजय जैन ने। उनका संचालन इतना लाजवाब था कि श्रोताओं में बैठे सभी साहित्यप्रेमी, पत्रकार बन्धु, विनोद पाराशर के मित्र व उनके परिवार जन कार्यक्रम के अंत तक डटे रहे। कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्वलन व मां सरस्वती की वंदना से किया गया था। सरस्वती वंदना का सस्वर पाठ श्रीमती ऊषा श्रीवास्तव जी ने किया।

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