विकास के सपने

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vidhyarthi

देश की हालत देखकर मन है बहुत उदास,
लोगों का सरकार पर रहा नहीं विश्वास।
रहा नहीं विश्वास, आस अब तक हर टूटी,
नेताओं की सारी बातें निकलीं झूठी।
जो विकास के सपने हमको दिखलाते हैं,
वे तो बस अपना विकास करते जाते हैं।

कृष्ण गोपाल विद्यार्थी

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